Literature

किस किस दौर से गुजरे हैं कवि दिविक रमेश ?

नवोदित की कलम से पतंग हूं.. और रहूंगी भी.. हर हाल पतंग ही।मैं कटती भी हूं.. काटने पर।बहुत इतराती भी हूंहवा में गाती झूमती भी हूं।जानती भी हूं तो मैं...